आज विज्ञान ने अद्भुत प्रगति की है और हमारे जीवन को काफी आरामदायक बना दिया है। लेकिन ऐसे कई सवाल हैं जो अभी भी विज्ञान के दायरे से बाहर हैं। उदाहरण के लिए, विज्ञान ने हमें परमाणु के बारे में बताया, लेकिन यह वास्तविक तस्वीर देने में असमर्थ है, विज्ञान ने हमें प्रकाश की गति के बारे में बताया है, लेकिन इसकी आधी गति पर भी हमें चलना असंभव लगता है। विज्ञान केवल यह समझने के लिए बड़े पैमाने पर सिद्धांत दिये है कि ब्रह्मांड कैसे बना था, लेकिन यह पूरी तरह से साबित करने में असमर्थ है। अब ईश्वर की शक्ति की कल्पना कीजिए जिसने इन चीजों को बनाया है, जो हमें बिना ऑक्सीजन के गर्भ में जीवित रखता है, जो जन्म के ठीक बाद बच्चे के लिए दूध की व्यवस्था करता है? चूँकि विज्ञान एक वास्तविक ईश्वर के बारे में कुछ भी बताने में विफल रहता है, इसलिए वह विभिन्न धर्मों की आध्यात्मिक पुस्तकों और उनके द्वारा और उनके धन्य संतों के माध्यम से, अपने रहस्य का खुलासा करता है। आइए विभिन्न धर्मों के इन रहस्यों को समझते हैं।।
सभी धर्मों को बारी- बारी से देखते है
ईसाई धर्म
पवित्र बाइबल में भगवान का नाम कबीर है - अय्यूब 36:5
अय्यूब 36:5 (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल - OJB)
परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है।
परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है।
बाइबल ने भी स्पष्ट किया है की प्रभु का नाम कबीर है।
अनुवाद कर्ताओ नें कबीर की जगह शक्तिशाली व सामर्थ वाला लिख दिया है। वास्तव में परमात्मा का नाम कबीर है। वेदो में, भगवद गीता में, श्री गुरु ग्रंथ साहिब में और कुरान शरीफ में भी परमात्मा का नाम कबीर है।
पवित्र बाईबल में प्रभु मानव सदृश साकार का प्रमाण
पवित्र बाईबल
(उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1:20 - 2:5 पर)
छटवां दिन:- प्राणी और मनुष्य:
अन्य प्राणियों की रचना करके
26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाऐं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा।
27. तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टी की।
29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है।
सातवां दिन:- विश्राम का दिन:
परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टी की उत्पत्ति की तथा सातवें दिन विश्राम किया।
पवित्र बाईबल ने सिद्ध कर दिया कि परमात्मा मानव सदृश शरीर में है, जिसने छः दिन में सर्व सृष्टी की रचना की तथा फिर विश्राम किया।
उत्पति विषय में लिखा है कि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया। इससे सिद्ध है कि प्रभु भी मनुष्य जैसे शरीर युक्त है तथा छः दिन में सृष्टी रचना करके सातवें दिन तख्त पर जा विराजा।
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मुस्लिम धर्म
पवित्र कुरान शरीफ में प्रभु सशरीर है तथा उसका नाम कबीर है का प्रमाण
पवित्र कुरान शरीफ़ से सहाभार ज्यों का त्यों लेख”
सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत नं. 52 से 59
(इन आयत नं. 52 से 59 में विशेष प्रमाण है)
(कृप्या देखें पवित्र कुरान शरीफ से ज्यों का त्यों फोटो कापी लेख)
आयत 52:- फला तुतिअल् - काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा(कबीरन्)।52।
तो (ऐ पैग़म्बर !) तुम काफ़िरों का कहा न मानना और इस (र्क़ुआन की दलीलों) से उनका सामना बड़े जोर से करो। (52)
आयत नं. 52 का ऊपर अनुवाद किसी मुसलमान श्रद्धालु का किया हुआ है। तत्वज्ञान के अभाव से ग्रन्थ के वास्तविक अर्थ को प्रकट नहीं कर सका। वास्तव में इसका भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी का खुदा (प्रभु) कह रहा है कि हे पैगम्बर ! आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं तथा मूर्ति आदि की पूजा करते हैं) का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को पूर्ण परमात्मा नहीं मानते। आप मेरे द्वारा दिए इस र्कुआन के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही पूर्ण प्रभु है तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना(लड़ना नहीं) अर्थात् अडिग रहना।
आयत 58:- व तवक्कल् अलल् हरिूल्लजी ला यमूतु व सब्बिह् बिहम्दिही व कफा बिही बिजुनूबि अिबादिही खबीरा(कबीरा)।58।
और (ऐ पैग़म्बर ! ) उस जिन्दा (चैतन्य) पर भरोसा रखो जो कभी मरनेवाला नहीं और तारीफ़ के साथ उसकी पाकी बयान करते रहो और अपने बन्दों के गुनाहों से वह काफ़ी ख़बरदार है (58)
आयत संख्या 58 का ऊपर अनुवाद किसी मुसलमान भक्त का किया हुआ है जो वास्तविकता प्रकट करने में असमर्थ रहा है। वास्तव में इस आयत संख्या 58 का भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभु मानते हैं वह कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला नहीं है अर्थात् वास्तव में अविनाशी है। तारीफ के साथ उसकी पाकी(पवित्र महिमा) का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह(कविर्देव) पूजा के योग्य है तथा अपने उपासकों के सर्व पापों को विनाश करने वाला है।
आयत 59:- अल्ल्जी खलकस्समावाति वल्अर्ज व मा बैनहुमा फी सित्तति अय्यामिन् सुम्मस्तवा अलल्अर्शि अर्रह्मानु फस्अल् बिही खबीरन्(कबीरन्)।59।।
जिसने आसमानों और जमीन और जो कुछ उनके बीच में है (सबको) छः दिन में पैदा किया, फिर तख्त पर जा विराजा (वह अल्लाह बड़ा) रहमान है, तो उसकी खबर किसी बाखबर (इल्मवाले) से पूछ देखो। (59)
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हिंदू धर्म
पवित्र यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्र 25 -
जिस समय भक्त समाज को शास्त्राविधी त्यागकर मनमाना आचरण (पूजा) कराया जा रहा होता है। उस समय कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्व ज्ञान को प्रकट करता है।
पवित्र सामवेद संख्या 1400 में
संख्या न. 359 सामवेद अध्याय न. 4 के खण्ड न. 25 का श्लोक न. 8 -
जो कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है। वह सर्वशक्तिमान है तथा काल (ब्रह्म) के कर्म रूपी किले को तोड़ने वाला है वह सर्व सुखदाता है तथा सर्व के पुजा करने योग्य है।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 19
कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ही अनामी पुरुष रूप में चौथे धाम अर्थात् अनामी लोक में भी अन्य तेजोमय रूप धारण करके रहता है।
यजुर्वेद
परमात्मा साकार है व सहशरीर है
यजुर्वेद अध्याय 5, मंत्र 1, 6, 8, यजुर्वेद अध्याय 1, मंत्र 15, यजुर्वेद अध्याय 7 मंत्र 39, ऋग्वेद मण्डल 1, सूक्त 31, मंत्र 17, ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 86, मंत्र 26, 27, ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 82, मंत्र 1 - 3 (प्रभु रजा के समान दर्शनिये है)
पवित्र सामवेद संख्या 1400 में
संख्या न. 359 सामवेद अध्याय न. 4 के खण्ड न. 25 का श्लोक न. 8 -
जो कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है। वह सर्वशक्तिमान है तथा काल (ब्रह्म) के कर्म रूपी किले को तोड़ने वाला है वह सर्व सुखदाता है तथा सर्व के पुजा करने योग्य है।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 19
कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ही अनामी पुरुष रूप में चौथे धाम अर्थात् अनामी लोक में भी अन्य तेजोमय रूप धारण करके रहता है।
यजुर्वेद
परमात्मा साकार है व सहशरीर है
यजुर्वेद अध्याय 5, मंत्र 1, 6, 8, यजुर्वेद अध्याय 1, मंत्र 15, यजुर्वेद अध्याय 7 मंत्र 39, ऋग्वेद मण्डल 1, सूक्त 31, मंत्र 17, ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 86, मंत्र 26, 27, ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 82, मंत्र 1 - 3 (प्रभु रजा के समान दर्शनिये है)
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सिख धर्म
गुरु ग्रन्थ साहेब
राग तिलंग महला 1 - गुरु ग्रन्थ साहेब पृष्ठ नं. 721 जिसमें कबीर परमेश्वर का नाम स्पष्ट लिखा है।
श्री गुरु नानक साहेब जी कह रहे हैं कि हे हक्का कबीर (सत् कबीर)! आप निर्विकार दयालु परमेश्वर हो। आप से मेरी एक अर्ज है कि मैं तो सत्यज्ञान वाली नजर रहित तथा आपके सत्यज्ञान के सामने तो निर्उत्तर अर्थात् जुबान रहित हो गया हूँ। हे कुल मालिक! मैं तो आपके दासों के चरणों की धूल हूँ, मुझे शरण में रखना!
सिख धर्म
गुरु ग्रन्थ साहेब
राग तिलंग महला 1 - गुरु ग्रन्थ साहेब पृष्ठ नं. 721 जिसमें कबीर परमेश्वर का नाम स्पष्ट लिखा है।
श्री गुरु नानक साहेब जी कह रहे हैं कि हे हक्का कबीर (सत् कबीर)! आप निर्विकार दयालु परमेश्वर हो। आप से मेरी एक अर्ज है कि मैं तो सत्यज्ञान वाली नजर रहित तथा आपके सत्यज्ञान के सामने तो निर्उत्तर अर्थात् जुबान रहित हो गया हूँ। हे कुल मालिक! मैं तो आपके दासों के चरणों की धूल हूँ, मुझे शरण में रखना!
निष्कर्ष
हमें सच्चे ईश्वर कबीर से दूर रखने के लिए, वह बहुत से प्रयास करता है जैसे वह इस दुनिया में झूठ फैलाता है। सभी पवित्र पुस्तकों में उन्होंने अपनी महिमा लिखी है। लेकिन भगवान कबीर के डर की वजह से, काल ने कुछ स्थानों पर भगवान कबीर का उल्लेख किया, लेकिन वह भी बहुत गोपनीय तरीके से, जिन्हें पहचानना मुश्किल है और उन्हें समझना असंभव के बगल में है। इन शास्त्रों में लिखे गए ईश्वर के ज्ञान को समझना आसान नहीं है और एक आम आदमी की समझ से परे है। यह असंभव कार्य अल्लाहु कबीर के धन्य संत द्वारा पूरा किया जाता है ताकि भक्त असली भगवान के बारे में सच्चाई को समझ सकें। वर्तमान में वह पूर्ण संत संत रामपाल जी महाराज जी हैं, जिन्होंने सतलोक का मार्ग दिखाने के लिए सभी धार्मिक ग्रंथों का वर्णन किया है, जहाँ कोई मरता नहीं है और जहाँ कोई वृद्ध नहीं होता है। संत रामपाल जी द्वारा दिखाए गए पूजा के सही मार्ग का अनुसरण करके हम अमर स्थान सतलोक वापस जा सकते हैं।





Nice
ReplyDeleteGreat knowledge
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteबहुत अच्छा ज्ञान है जी
DeleteFabulous Blog post...
ReplyDelete🙏🙏
Deletenice
ReplyDeleteSachi baat
ReplyDeleteSure
Deleteचार् दाग से सत गुरु न्यारा,अजरोअमर् शरीर्।
ReplyDeleteदास मलूक् सलूक् कहत है, खोजो ख्सम् कबीर।।